पतंजलि योगपीठ

दुष्कर्मियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से फांसी की सजा मिले: रामदेव

दुष्कर्मियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से फांसी की सजा मिले: रामदेव
हरिद्वार। योग गुरु स्वामी रामदेव ने दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता जताते हुए बलात्कारियों के खिलाफ सख्त कानून बनाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर फांसी की सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में दुष्कर्म की एक भी घटना नहीं होनी चाहिए। रामदेव ने भ्रष्टाचारियों और गोहत्या के मामलों में भी कठोर सजा दिए जाने की बात कही। वह सोमवार को रामनवमी के अवसर पर बहादराबाद स्थित पतंजलि योगपीठ में कन्या पूजन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
स्वामी रामदेव ने कन्याओं के चरण वंदन कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि सनातन भारतीय दृष्टि में संपूर्ण सृष्टि देवीमय है। हर नाम, रूप और स्वरूप में भगवती के दर्शन किए जाते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। नवरात्र और रामनवमी जैसे पर्वों की सार्थकता तभी है, जब समाज महिलाओं और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को जीवन में अपनाकर ही सनातन संस्कृति और देश के गौरव को मजबूत किया जा सकता है।
कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हादसे में श्रद्धालुओं की मौत पर भी रामदेव ने दुख जताया। उन्होंने दिवंगत श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की कामना की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पंडालों में अग्निशमन उपकरण, मजबूत ढांचा, भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन निकासी और आवागमन के सुगम रास्तों की व्यवस्था जरूरी है। संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रही बहस पर उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। नियुक्ति और पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान के दायरे में ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया समेत विभिन्न क्षेत्रों में कमियों को दूर करने के लिए आंदोलन और सुधार हो सकते हैं, लेकिन बदलाव लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होने चाहिए।
सिविल सोसायटी और सीजेपी का जिक्र करते हुए रामदेव ने कहा कि राजनीतिक पक्षों और विपक्ष को लेकर लोगों के मन में शंकाएं पैदा होने पर सामाजिक संस्थाएं और नागरिक समाज जनहित के मुद्दे उठा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा संवैधानिक दायरे में रहकर जनहित के मुद्दों पर काम करेंगे और देश के नागरिकों के हित में सकारात्मक योगदान देंगे।

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