राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh ने वीर बाल दिवस के अवसर पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में वीर साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने विशेष पहल के रूप में ‘‘एटरनल गुरु’’ एआई चैटबॉट का अनावरण किया। यह चैटबॉट गुरबाणी पर आधारित है, जो श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा शिक्षाओं को तकनीक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने में सक्षम है। इस चैटबॉट को उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सहयोग से तैयार किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि आज वीर साहिबजादों के त्याग, बलिदान, साहस को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि नन्हें साहिबजादों ने अत्याचारियों की बात न मानते हुए सिख धर्म की उस महान परम्परा को आगे बढ़ाया, जिसमें अन्यायी शासकों के सामने कभी न झुकने की महान शिक्षा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह दिन एक संदेश देता है कि सच्चे साहस और बलिदान की कोई उम्र सीमा नहीं होती।
उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के महान बलिदानी पुत्रों की शहादत को वीर बाल दिवस के रूप में मनाये जाने के निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने ऐसे योद्धाओं के बलिदान को चिरस्थायी बनाने का जो कार्य किया है उसे सदैव याद किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि वीर बाल दिवस हम सभी के लिए न केवल शौर्य और त्याग का प्रतीक है, बल्कि यह हमें अपने अतीत के गौरव को समझने और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए, कुछ भी कर गुजरने के संकल्प का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम में गुरमत संगीत विद्यालय, ऋषिकेश के छात्रों द्वारा ‘‘गाथा-ए-बलिदान’’ शीर्षक से एक संगीतमय प्रस्तुति दी गई। इस भावात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान की अमर कहानी से अवगत कराया। वीर बाल दिवस के अवसर पर हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘‘चार साहिबजादे’’ व संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘‘साहिबजादेः परंपरा के अग्रदूत‘‘ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तकें गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के त्याग, वीरता और बलिदान पर आधारित है।



