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श्रीमद्भागवत मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है

देहरादून, चुखुवाला में प्राचीन शिव मंदिर मे श्रीमदभागवत कथा का समापन किया गया, व्यास आचार्य जगदीश प्रशाद भट्ट ने बताया की भागवत कथा सप्ताह का अंतिम अध्याय मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, कंस वध, रुक्मणी विवाह, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथाओं पर केंद्रित होता है, जिसमें नाम संकीर्तनम के महत्व और भगवान की कृपा से सभी पाप और दुखों के नाश का वर्णन किया जाता है।
कथा के अंतिम दिन विधि-विधान से हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति की जाती है, जिससे देवता प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल प्रदान करते हैं.
ब्यास जगदीश प्रशाद भट्ट ने कहा की भागवत कथा का अंतिम उपदेश होता है कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है, और मृत्यु के बाद कैसी स्थिति होती है.
भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं और उसके विचारों में बदलाव आता है, जिससे उसके आचरण में भी स्वयं बदलाव आता है.
कलशयात्रा मे आचार्य द्वारिका प्रशाद भट्ट, देवानंद सेमवाल, भक्ति राम भट्ट, ज्योति प्रशाद भट्ट, मनीष लेखवार समेत अनिल डोभाल, सुनील डोभाल, रीना, आदित्य डोभाल अपूर्वा, रेखा खंडूरी, प्रतिष्ठा, सुनिष्ठा, आशु, शौर्य, राकेश डोभाल, शंकर डोभाल, संतोष आदि शामिल रहे,

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