देहरादून। यमुना नदी क्षेत्र और आसन संरक्षण रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में बड़े पैमाने पर अवैध खनन, खनिज भंडारण और परिवहन के गंभीर आरोपों के बीच वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) कालसी ने जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजकर विकासनगर और सहसपुर क्षेत्र में संचालित स्टोन क्रशरों तथा आरबीएम/बालू भंडारण केंद्रों का विशेष ऑडिट कराने और संयुक्त निरीक्षण करवाने की मांग की है।
वन विभाग के अनुसार यमुना नदी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें मिल रही हैं। विभाग का दावा है कि निरीक्षणों, स्थानीय सूचनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिले हैं कि बड़ी मात्रा में आरबीएम, बालू और अन्य खनिजों का अवैध उत्खनन कर भंडारण एवं परिवहन किया जा रहा है।
गूगल अर्थ की तस्वीरों में बढ़ता खनन क्षेत्र
वन विभाग ने वर्ष 2022, 2024 और 2025 के गूगल अर्थ उपग्रह चित्रों के तुलनात्मक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा है कि कालसी से रामपुर मंडी तक यमुना नदी क्षेत्र में खनन से प्रभावित क्षेत्र लगातार बढ़ा है। विभाग के अनुसार वर्ष 2022 में यह क्षेत्र लगभग 120 से 150 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 300 से 380 हेक्टेयर तक पहुंच गया। विभाग का मानना है कि यह वृद्धि प्राकृतिक कारणों के बजाय व्यापक खनन गतिविधियों का परिणाम है।
करोड़ों की राजस्व हानि का अनुमान
वन विभाग ने अनुमान लगाया है कि ईको-सेंसिटिव जोन में 96 लाख से 1.22 करोड़ टन तक खनिज सामग्री का अवैध उत्खनन हुआ हो सकता है। इससे सरकार को लगभग 67 से 85 करोड़ रुपये की रॉयल्टी हानि हुई है, जबकि दंडात्मक देनदारी 201 से 255 करोड़ रुपये तक बन सकती है। कुल संभावित वित्तीय दायित्व 268 से 340 करोड़ रुपये के बीच आंका गया है।
इसके अलावा डाकपत्थर-कालसी क्षेत्र में भी 90 से 120 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए 80 से 107 करोड़ रुपये तक की संभावित देनदारी का अनुमान लगाया गया है।
ड्रोन सर्वे और संयुक्त जांच की मांग
वन विभाग ने कालसी से रामपुर मंडी तक पूरे यमुना नदी क्षेत्र का वन, राजस्व, पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण कराने की मांग की है। विभाग ने ड्रोन सर्वेक्षण, जीआईएस मैपिंग और उपग्रह चित्रों के वैज्ञानिक विश्लेषण को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने की सिफारिश की है
वन विभाग ने जिलाधिकारी से स्टोन क्रशरों और खनिज भंडारण केंद्रों का विशेष ऑडिट कराने, रॉयल्टी रसीदों और परमिटों की जांच करने तथा अवैध खनन, भंडारण या परिवहन में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव उत्तराखंड और गढ़वाल मंडल आयुक्त को भी भेजी गई है।

