ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन सड़क की अंतिम बाधा दूर
-हाईकोर्ट ने पर्यावरणविदों की एनएचएआई के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज की
-परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को कोर्ट के पुराने आदेशों का बताया था उल्लंघन
-कोर्ट ने कहा, एनएचएआई ने किसी भी अदालती आदेश की अवहेलना नहीं की
नैनीताल, संवाददाता। हाईकोर्ट ने पर्यावरणविदों की ओर से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन सड़क परियोजना के लिए की जा रही पेड़ों की कटाई कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि एनएचएआई द्वारा किसी भी अदालती आदेश की अवहेलना नहीं की गई है। वर्तमान में इस परियोजना पर कोई अंतरिम रोक या प्रतिबंध लागू नहीं है।
इससे पहले 9 जनवरी 2026 को ही हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा था कि बहुचर्चित ‘हाथी कॉरिडोर’ का विवाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही पूरी तरह तय किया जा चुका है। इसके बाद जब 18 मार्च 2026 को एक स्पष्टीकरण याचिका दायर की गई, तब भी हाईकोर्ट ने साफ कर दिया था कि पेड़ों की कटाई पर पूर्व में लगाई गई अंतरिम रोक की अवधि को कभी आगे नहीं बढ़ाया गया था, जिसका सीधा मतलब है कि परियोजना को रोकने के लिए कोई कानूनी आदेश अस्तित्व में नहीं था।
परियोजना के मार्ग पर 4639 पेड़ चिह्नित
इस परियोजना के मार्ग में आने वाले कुल 4639 पेड़ों को हटाने के लिए चिह्नित किया गया है। एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधते हुए 754 पेड़ों को पूरी तरह काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित रूप से दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) किया जाएगा। इसके अलावा संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र होने के कारण हाईवे पर हाथियों और अन्य जानवरों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिसके तहत एलीफेंट अंडरपास, प्राकृतिक हरी झाड़ियों की सुरक्षा दीवारें और विशेष वन्यजीव चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे।
वैधानिक अनुमतियां पहले ही कर चुके हासिल
एनएचएआई के अनुसार, इन सभी सुरक्षा उपायों का खाका वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है और इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी हैं। इस मामले में ‘सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून’ जैसे स्थानीय पर्यावरण संगठन अब भी एनएचएआई कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा अवमानना याचिका को खारिज किए जाने के बाद अब इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में आ रही अंतिम कानूनी बाधा भी पूरी तरह समाप्त हो गई है।