*भागवत कथा के अंतिम दिन कृष्ण-सुदामा प्रसंग से उमड़ा भक्ति का सैलाब*
श्रीनगर, सवाददाता!
भागवत कथा के सप्तम और अंतिम दिन सोमवार को व्यासपीठ से आचार्य विपिन चंद्र थपलियाल के मुख से
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। श्रीनगर के श्रीकोट मे
विनोद कगडियाल और सुबोध कगडियाल परिवार की ओर से श्रीभागवत कथा का आयोजन किया गया था,
कथा वाचक ने बताया कि वर्षों बाद गरीब ब्राह्मण सुदामा मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। तन पर फटे वस्त्र, हाथ में चावल की पोटली और हृदय में संकोच लेकर आए सुदामा को देखते ही द्वारकाधीश सिंहासन से उठकर दौड़े और अपने बालसखा को गले लगा लिया।
मेंआचार्य विपिन चंद्र थपलियाल ने बताया कि सुदामा संकोचवश चावल की भेंट न दे सके, लेकिन अंतर्यामी कृष्ण ने स्वयं उनके गठरी से चावल खाकर तीन लोक का सुख दे दिया। कृष्ण ने मित्रता में जाति, गरीबी-अमीरी का भेद न मानकर प्रेम को सर्वोपरि बताया।
वापस लौटते समय सुदामा ने कुछ न मांगा। घर पहुंचने पर उन्हें स्वर्ण का महल मिला। इस प्रसंग से संदेश दिया गया कि सच्ची मित्रता और निष्काम भक्ति ही ईश्वर को प्रिय है।
0 0 1 minute read


