!! जय माँ भगवती नन्दा !!
प्रचलित माँ नन्दा जात यात्रा के अंतर्गत तीनों परगनों की देव डोलियां अपने-अपने निर्धारित पड़ावों पर सकुशल पहुंच चुकी हैं।
परगना दशोली एवं बंड की देव डोली केलवा विनायक, रूपकुंड एवं ज्योरांगली होते हुए शिलासमुद्र पहुंची। इस दौरान नन्दा अष्टमी के पावन अवसर पर रूपकुंड में माँ नन्दा की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की गई।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगभग 5,029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रूपकुंड झील अपने आसपास मिले सैकड़ों प्राचीन मानव कंकालों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। त्रिशूल पर्वत के निकट स्थित यह झील प्राकृतिक सौंदर्य, दुर्गम रास्तों और माँ नन्दा से जुड़ी लोकमान्यताओं के लिए भी विशेष पहचान रखती है। कल दशोली एवं बंड की देव डोली यहां से होमकुंड के लिए प्रस्थान करेगी।
परगना बधाण की देव डोली द्वारा कल 18 सितम्बर 2026 को नंदा सप्तमी के पावन अवसर पर वेदनी कुंड में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र वेदनी कुंड की परिक्रमा कर अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ तर्पण किया। आज बधाण की देव डोली अपने निर्धारित पड़ाव ल्वाणी गांव पहुंची।



