रूद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जनपद में सावन माह के बीच आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। विश्व प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव गुफा बुधवार सुबह पूरी तरह अलकनंदा नदी के उफनते जल में समा गई। कल तक जहां श्रद्धालु किसी तरह गुफा के भीतर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर रहे थे, वहीं आज बढ़े हुए जलस्तर के कारण गुफा पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।
सावन मास में भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इस दृश्य को अत्यंत दिव्य और चमत्कारी मान रहे हैं। भक्तों का कहना है कि हर साल सावन माह में स्वयं मां अलकनंदा भगवान कोटेश्वर महादेव का जलाभिषेक करती हैं, जो दुर्लभ और अलौकिक अनुभव है।
गुफा में प्रवेश पूरी तरह बंद होने के कारण श्रद्धालु दूर से ही हाथ जोड़कर भगवान शंकर का स्मरण कर रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोटेश्वर महादेव मंदिर के व्यू प्वाइंट से जलमग्न गुफा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। गुफा के डूब जाने से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम देखी जा रही है।
रूद्रप्रयाग नगर से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर का यह अद्भुत दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उफनती अलकनंदा के बीच पूरी तरह जलमग्न गुफा श्रद्धा, प्रकृति और आध्यात्मिक विश्वास का अनूठा संदेश दे रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सावन में इस प्रकार का दृश्य अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे भगवान शिव की विशेष कृपा का प्रतीक समझा जाता है।
लगातार हो रही बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से नदी किनारे जाने तथा जलमग्न क्षेत्रों में प्रवेश न करने की अपील की है।


