त्यूणी। किसाऊ बांध परियोजना के विरोध में बुधवार को क्वानू क्षेत्र के ग्रामीण बच्चों को साथ लेकर सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए बांध निर्माण के फैसले का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि परियोजना आगे बढ़ी तो कई गांवों के अस्तित्व पर संकट आएगा और बड़ी मात्रा में सिंचित कृषि भूमि जलमग्न हो सकती है। इससे खेती पर निर्भर परिवारों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने कहा कि उनके लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी जन्मभूमि, आजीविका और सामाजिक पहचान है। बांध बनने से गांवों से विस्थापन हुआ तो बच्चों को भी अपने पुश्तैनी गांव, खेत, स्कूल और सामाजिक परिवेश से दूर होना पड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों को प्रदर्शन में साथ लाने का उद्देश्य यह बताना है कि परियोजना का असर केवल वर्तमान पीढ़ी पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांध निर्माण का निर्णय लेने से पहले प्रभावित क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त रूप से विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि परियोजना से होने वाले संभावित लाभों की चर्चा की जा रही है, लेकिन डूब क्षेत्र, कृषि भूमि, मकानों, जंगल, स्थानीय रोजगार और विस्थापन के सामाजिक प्रभाव को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में खुली जनसुनवाई कराई जाए और प्रत्येक गांव पर पड़ने वाले प्रभाव की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने जमीन के मुआवजे के साथ-साथ आजीविका, पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक पुनर्वास की ठोस योजना पहले सार्वजनिक करने की मांग की। कहा कि विकास परियोजनाओं का विरोध विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी परियोजना की कीमत यदि स्थानीय लोगों को अपनी जमीन, घर और जड़ों से विस्थापित होकर चुकानी पड़े तो सरकार को उनके सवालों का जवाब देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया गया तो विरोध को और व्यापक किया जाएगा।
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